देश की सबसे बड़ी प्याज़ की मंडी नासिक की लासलगांव मंडी में गुरुवार को नए सीजन की आवक में भारी बढ़ोतरी होने से प्याज़ की कीमत लगभग 600-650 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गयी। अत्यधिक उत्पादन और आवक के कारण प्याज़ की कीमत पिछले दो साल में सबसे कम है। गिरती कीमतों के चलते देश के प्याज किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। गुणवत्ता खराब होने के डर से किसानों किसी भी कीमत पर प्याज को बेच रहे है।जबकि मौजूदा कीमत उत्पादन की औसत लागत 5.50 रुपये प्रति किलोग्राम से भी कम है। हालांकि देश के अधिकतर खुदरा बाज़ार मे प्याज़ 12-18 रुपये प्रति किलो के औसत भाव पर बिक रही है।
गौरतलब है कि खरीफ सीजन में उपजे लाल प्याज का लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है। पिछले सीजन में जब कीमतें बढऩी शुरू हुईं, तो सरकार ने हमे फसल कटाई के वक्त मदद का भरोसा दिलाया था। अब सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं है। फिलहाल देश के विभिन्न बाजारों में प्याज की जो आवक हो रही है, वह पिछले खरीफ सीजन की उपज है। यह प्रमुख रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश से आ रही है
नाशिक स्थित 'राष्ट्रिय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के निदेशक आर पी गुप्ता ने बताया कि देश में पिछले साल के 1.893 करोड़ टन की तुलना में इस साल प्याज़ उत्पादन 5-7 फीसदी ज्यादा होकर 2.05-2.08 करोड़ टन रहने का पूर्वानुमान है। उन्होने बताया कि प्याज़ का रकबा पिछले साल के 11.7 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल 12-13 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। भारत हर साल करीब 15 लाख टन प्याज का निर्यात करता है। लेकिन भारत ने कीमतें चढऩे से रोकने के लिए पिछले साल 25,000 टन प्याज का आयात किया था।
