देश में इस साल लगातार नौ महीने कम बारिश हुई है, जो वर्ष 2009 के बाद सबसे सूखा साल है। जिसके कारण फसलों के उत्पादन पर असर पड़ेगा। हालांकि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल भारत में में सर्दियों में हने वाली बारिश मार्च- अप्रैल तक हो सकती है। जिसके कारण रबी की खड़ी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। इससे पहले 2015 के मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य के मुकाबले 86 फीसदी बरसात होने के चलते मिट्टी में जरूरी नमी की कमी से भी फसलों पर संकट बढ़ा है।
हालांकि मौसम विभाग ने कहा है कि रबी की फसल के लिए अभी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। विभाग ने अनुमान दिया है कि फरवरी में तापमान औसत से ज्यादा रह सकता है। वहीं आईएमडी के प्रबंध निदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर के मुताबिक “मौसम का आंकलन करने वाले मॉडल मार्च-अप्रैल मे सामान्य के मुकाबले ज्यादा बरसात होने का संकेत दे रहे हैं” उन्होने ने बताया कि बारिश की मात्र और उसके क्षेत्र के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
आईएमडी के वैज्ञानिकों के अनुसार अल-निनों वर्ष में सर्दियों मे होने वाली बारिश का फैलाव देखा जाता है। पिछले अल-निनों साल (2015 और 2009) में देखा गया था कि जाड़े कि बारिश अप्रैल तक बढ़ जाता है। ऐसा इस साल भी हो सकता है। गेहूं और बार्ले अनुसंधान निदेशालय,करनाल की निदेशक इंदु शर्मा के मुताबिक मार्च के आखिर में कम तापमान के साथ बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन अगर मार्च और अप्रैल में भरी बारिश हुई तो फसलों को नुकसान होगा।
