देश में पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर मॉनसून और बेमौसम बारिश के कारण देश में दलहन उत्पादन में गिरावट हुई है। जिसके चलते पिछले साल दालों की कीमतें रिकर्ड 200 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुँच गयी थी. हालांकि सरकार द्वारा आयात और अब नयी फसल की आवक बढ़ने के साथ अरहर व अन्य दालों के दाम में कमी आई है। इससे पहले केंद्र ने राज्यों के साथ मिलकर देशभर में छापेमारी में 1.3 लाख टन दालें जब्त की थीं. जिसे बाजार में बिक्री के लिए उतारा गया था।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस साल जनवरी के अंत तक रबी सत्र में दलहन का रकबा 139.08 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी समय तक 143 लाख हेक्टेयर था।
फसल वर्ष 2014-15 (जुलाई से जून) में दालों का उत्पादन घटकर 1.72 करोड़ टन रहा था, जबकि पिछले साल उत्पादन 1.93 करोड़ टन था। वर्ष 2015-16 के दौरान भी उत्पादन में ज्यादा बढ़त के आसार नहीं हैं और कुल उत्पादन 1.8 करोड़ टन होने का अनुमान है। जिससे आने वाले महीनों में दाल की कीमतें तेज रह सकती हैं।
भारत दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता तथा आयातक है। देश में सालाना करीब 2.2 से लेकर 2.3 करोड़ टन दालों की खपत होती है और उत्पादन में कमी का अंतर आयात से पूरा होता है। साल 2015-16 में दालों की आपूर्ति की कमी से निपटने के लिए केंद्र ने पिछले साल लगभग 10,000 टन दाल आयात के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। साथ ही केंद्र ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 250 से 275 रुपए/क्विंटल वृद्धि की ताकि किसानों को उचित भाव मिल सके।
गौरतलब है कि सरकार ने दलहन कीमतों पर नियंत्रण हेतु पहली बार 1.5 लाख टन दलहन का बफर स्टाक बनाने का निर्णय किया है। जिसके तहत सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से सीधे दाल खरीद की जा रही है।
