देश में दलहन की नयी फसल की आवक होने और आयातित दालों की सप्लाई बढ़ने से जहां थोक बाज़ार में दाल की कीमतें पिछले साल अक्टूबर के उच्चतम स्तर से करीब 30 फीसदी तक नीचे आ गई हैं, वहीं खुदरा बाज़ार की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं आया हैं। देश में दालों की प्रमुख थोक मंडी वाशी में दालों की कीमत कुछ समय पहले अपने ऊपरी स्तर से करीब 30 फीसदी तक गिरावट के बाद अरहर (तूर) की कीमतें 100-110 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई है। दिल्ली में भी चने की थोक कीमत ऊंचाई से 15 फीसदी तक गिरकर 46-50 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गयी है।
हालांकि थोक बाजार में तेज गिरावट के बावजूद ग्राहकों को अरहर दाल के लिए 170-180 रुपये प्रति किलोग्राम चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं एक किलो पैक्ड अरहर के दाम 180-200 रुपये के बीच चल रही हैं। पिछले साल अक्टूबर में अरहर दाल की खुदरा कीमतें बढ़कर 200 रुपये प्रति किलो के रिकार्ड स्तर पर पहुँच गयी थी, तब सरकार ने दालों पर स्टॉक सीमा लगाई थी। साथ ही देश भर में जमाखोरों पर छापेमारी से 1.3 लाख टन दालें जब्त कर उन्हे खुले बाजार में बिक्री के लिए उतारा और 5000 टन अरहर का आयात किया था। इंडियन पल्सेस ऐंड ग्रेंस एसोसिएशन (आईपीजीए) के उपाध्यक्ष बिमल कोठारी ने कहा, 'सरकार को किसानों को लाभ देते हुए उत्पादकता बढ़ाने की योजना बनानी चाहिए।'
देश में सालाना करीब 2.2 से लेकर 2.3 करोड़ टन दालों की खपत होती है और उत्पादन में कमी का अंतर आयात से पूरा होता है। फसल वर्ष 2014-15 (जुलाई से जून) में दालों का उत्पादन घटकर 1.72 करोड़ टन रहा था, जबकि वर्ष 2015-16 के दौरान भी उत्पादन में ज्यादा बढ़त के आसार नहीं हैं और कुल उत्पादन 1.8 करोड़ टन होने का अनुमान है। जिससे आने वाले महीनों में दाल की कीमतें तेज रह सकती हैं।
