देश में लगातार दो वर्षो से सूखे और पिछले साल की कम बारिश के कारण देश में खाद्यान उत्पादन के साथ जलाशयों के जलस्तर में भी गिरावट आई है। देश के प्रमुख 91 जलाशयों में 04 फरवरी तक 59.335 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल बचा हुआ है। जो इन जलाशयों की कुल क्षमता का 38 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में ये 78 प्रतिशत थी। इन 91 जलाशयों की कुल क्षमता 157.799 बीसीएम है जो देश की अनुमानित भंडारण क्षमता 253.388 बीसीएम का 62 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि इन 91 जलाशयों में से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है तथा 37 जलाशय में 60 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता है।
जलाशयों की क्षेत्रवार भंडारण स्थिति-
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण क्षमता 7.42 बीसीएम है जो कि कुल क्षमता का 41 प्रतिशत है।
पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। जहाँ 18.83 बीसीएम की कुल क्षमता वाले 15 जलाशय हैं। जिसमे कुल 9.77 बीसीएम जल उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 52 फीसदी है।
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्रल आते हैं। जहाँ 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं। जिसमे कुल 9.14 बीसीएम जल उपलब्ध है, जो कुल क्षमता का 34 फीसदी है।
मध्ये क्षेत्र मे उत्तर प्रदेश, उत्तकराखंड, मध्यी प्रदेश तथा छत्तींसगढ़ आते हैं। जहाँ 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय है।जिसमे कुल 19.50 बीसीएम जल उपलब्ध है,जो कुल क्षमता का 46 फीसदी है।
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु है।जहाँ 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं।जिसमे कुल 13.51 बीसीएम जल उपलब्ध है,जो कुल क्षमता का 26 फीसदी है।
पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जिन प्रमुख राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु शामिल हैं।
