देश में इस साल कमजोर मॉनसून के कारण खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने के बाद अब ठंड के मौसम की बरसात में भी कमी आई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ो के मुताबिक इस साल देश में 1 जनवरी से 3 फऱवरी तक 7.8 मिलीमीटर बरसात हुई जबकि सामान्य तौर पर इस दौरान 21.2 मिलीमीटर बरसात होती है। जिसके कारण रबी की खड़ी फसलों के वर्धी और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। इससे पहले 2015 के मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य के मुकाबले 86 फीसदी बरसात होने के चलते मिट्टी में जरूरी नमी की कमी से भी फसलों पर संकट बढ़ा है।
हालांकि देश के उत्तर पश्चिम इलाकों में जनवरी के दूसरे सप्ताह से ठंड लौटने उत्तर और मध्य भारत में ठंड के सीजन की हल्की बारिश होने से गेहूं व सरसों की फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम विभाग ने कहा है कि रबी की फसल के लिए अभी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। विभाग ने अनुमान दिया है कि फरवरी में तापमान औसत से ज्यादा रह सकता है।
वहीं मॉनसून में औसत से कम बारिश से रबी की प्रमुख फसल गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों के लिए 14 से 18 डिग्री के बीच का तापमान होना फायदेमंद है।गेहूं अनुसंधान निदेशालय,करनाल की निदेशक इंदु शर्मा ने कहा कि ‘बारिश और ठंड गेहूं की फसल के गेहूं की पैदावार के लिए महत्वपूर्ण होती है। अगर अगले कुछ दिनों में तापमान कम होता है, तो गेहूं की जबरदस्त फसल पा सकते हैं। लेकिन अगर मार्च के आस-पास तापमान बढऩे लगा तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है’।
